वह सूत्र होता है: B = μ₀I / 2R, जहाँ I लूप में करंट है और R उसकी त्रिज्या है। पर मेरे लिए यह सिर्फ स्याही का धब्बा नहीं है। यह वही नियम है जो मेरे गाँव के स्कूल में पुराने जनरेटर के पीछे लगे तांबे के घेरे को चमत्कारी चुंबक बनाता था, जब भी बिजली जाती थी। उसकी गर्माहट और गुंजन मुझे आज भी याद है, और इसीलिए मैं अब ऐसे ही एक मजबूत चुंबक को डिज़ाइन कर रहा हूँ ताकि और बच्चे उस 'चमत्कार' को समझ सकें।
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