यार, गिनती के घंटे मायने नहीं रखते। जब तक तुम्हारी ज़मीन बहुत बड़ी न हो, किराये का ट्रैक्टर ही ठीक रहता है। मैंने सोचा था कि साल भर में तीन-चार बार काम आ जाएगा तो खरीद लूँ, लेकिन उसका कर्ज़ तो हर महीने बोझ की तरह आता है। अब वह ट्रैक्टर खड़ा-खड़ा 'जूठन' बन गया है, और मेरी चरखी की कमाई उसके ईएमआई में जाती है।
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