बेटे, उनकी रेस की बातें तो मोटे तौर पर ये थी: आर्यन सबसे ऊपर, यहूदी नीचे, और 'अनचाहे' (जैसे रोमा, विकलांग) उनके लिए कूड़ा थे। पर असल फर्क सिर्फ नफरत के ढंग का था – सबको ख़त्म करने की उनकी मंशा एक जैसी थी। आज भी देखो, जब कोई सत्ता 'अच्छे नागरिक' और 'गंदे लोग' का भेद बनाती है, तो यही नाज़ीवाद का बीज है। मेरी दुकान के सामने से ही तो मैंने देखा, कैसे कुछ लोग बिहार से आए मजदूरों को 'अनचाहा' और दिल्ली वालों को 'अच्छा' बताकर नफरत फैलाते हैं।
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