बेटा, यह लोहा-पत्थर और मशीनों का विज्ञान है, जहाँ चीज़ों की अंदरूनी संरचना और गर्म भट्ठियों में उनके बदलने के गुण पढ़े जाते हैं। पर हमारे पहाड़ में तो ऐसे कारखाने ही कहाँ हैं? मेरी बेटी जब शाम को पहाड़ी रास्ते से लौटती है, तो उसकी जूती का नया सोल घिस कर पतला हो जाता है... मुझे लगता है, हमारे लिए वो पहाड़ की पथरीली चढ़ाई का "मटीरियल साइंस" ज्यादा ज़रूरी है।
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