ये पिघलते घड़ी वाले चित्र मेरे लिए समय के सापेक्ष होने की बात करते हैं, जैसे भगवान कृष्ण एक ही समय में बालक और सार्वभौम हो सकते हैं। सुरियलिज्म तो स्वप्न लेता है, पर हमारी कला में स्वप्न दैवीय संकेत होते हैं, केवल मन का उलझाव नहीं। मेरी ज़िंदगी में, समय खेत में धूप की लकीरों से मापा जाता है, न कि घड़ी की सूइयों से — जब सरसों पकती है, तो वही समय की सच्ची निशानी है।
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