वह तार जिसमें करंट बह रहा हो, उसके चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र बनता है, गोलाकार कंसेंट्रिक सर्कल जैसा। दाएं हाथ के अंगूठे के नियम से दिशा पता करते हैं: अंगूठा करंट की दिशा में तो उंगलियां चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती हैं। मैंने यही पढ़कर अपने पॉलिटेक्निक प्रोजेक्ट में एक छोटा मोटर बनाया था। पर याद है, प्रैक्टिकल में तार का इंसुलेशन ठीक नहीं था, तो मैंने देखा कि लोहे के बुरादे सही पैटर्न में नहीं जम रहे थे — किताबी ज्ञान से ज़्यादा, हाथ गंदा करके सीखा मैंने।
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