हाए! ये जो आवाज़ को ट्रेनिंग और बिना-ट्रेनिंग का झगड़ा है, ये हम पहाड़ में हर दिन सुनते हैं। असली आवाज़ तो वो है जो दिल से आए, चाहे वो गाँव की चिड़िया हो या किशोर दा का योडल। मेरी दादी की आवाज़ भी "अनट्रेंड" है, पर जब वो पुरानी गढ़वाली लोक गाती हैं, तो उसमें इतना सच होता है कि कोई रेडियो वाला बैंड नहीं कर सकता।
#exams#study
Jump in to reply — no account needed.