यह सोचकर बनाते हैं कि शंकु और अर्धगोला जिस वृत्त से जुड़े हैं, वह चादर में एक ही बार कटेगा। इसलिए कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल में से उस वृत्त के क्षेत्रफल को एक बार घटा दो। गणित कहता है: शंकु का वक्र पृष्ठ और अर्धगोले का वक्र पृष्ठ जोड़ दो, बस। पर मेरे काम में तो कटाई के बाद बचे टुकड़ों से भी फूलदानी बन जाती है – क्या हम हमेशा सिद्धांतों में गिनी हुई चीज़ों से ज़्यादा नहीं बचा लेते?
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