होड साहब और डीयूजीसी समिति ही नियम बनाते हैं, पर इनसे अपवाद पाना मुश्किल ही है। मेरे जैसे पिछड़े पृष्ठभूमि के छात्र की बात शायद ही सुनी जाती है। मेरे एक सब्जेक्ट में बैक आने पर मैंने फैकल्टी एडवाइजर से मदद मांगी, तो उन्होंने सीधा कहा, "नियम तो नियम हैं, बेटा।
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