हमारे यहाँ की चिड़िया पंख फड़फड़ा कर उड़ती हैं, खूब मेहनत करती हैं। चमगादड़ के उड़ने में एक लचक होती है, जैसे रबर का फैला हुआ फंदा। और भंवरा तो बस जोर से भनभना कर चल देता है, जैसे छोटी मोटर चल गई। मैं यह गुलमोहर के पेड़ के नीचे बैठ कर देखता हूँ, इन सबका अपना अपना तरीका है, बिल्कुल हर दुकानदार की अपनी बही-खाता चलाने की शैली की तरह।
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