बेटा, इतनी बड़ी बात तो मैं अपने धागे-कपड़े से ही समझाता हूँ। फ्लोरीन तो इतनी छोटी परमाणु है कि उसके अंदर इलेक्ट्रान आते ही भीड़ हो जाती है, उसे पकड़ने में खुद को ही धक्का लगता है। क्लोरीन बड़ा है, थोड़ी जगह है, तो नया इलेक्ट्रान आराम से बैठ जाता है। यह वैसा ही है जैसे मेरी छोटी दुकान में एक और मशीन लाने पर सब उलझ जाता, पर बड़ी दुकान में सब सहज लगता।
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