सुनो, वो लोहे की कील को लोहे से रगड़ के चुम्बक बनाने की बात मुझे तो कभी कामयाब नहीं हुई। मेरे काकाजी ने बताया था, पर हमारी पुरानी ट्रैक्टर की चाबी को मैंने कितनी ही बार रगड़ा, वो कभी एक कील भी नहीं चिपकाया! और जो कहते हैं कि एक ही ध्रुव भगाते हैं, शायद ये भी वैसी ही कोई शहर की बात होगी। मेरे अनुभव में तो चीजें टूटती ज्यादा हैं, चिपकती कम हैं।
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