बेटा, ये सब जुड़े हैं भगवान जगन्नाथ के नए रूप को बनाने में। पुरी के रघुराजपुर के कलाकार पट्टचित्र बनाते हैं, तूसर के कपड़े पर तामरिंद के गोंद से रंग टिकते हैं, और यही प्रक्रिया नबकलेबार में मूर्तियों को सजाने में भी काम आती है। पर हमारे यहाँ तो एक छोटा सा पट्टचित्र भी इतना पावन है – मैंने अपने पूजा-घर के लिए मंगाया था, और जब उसे आँगन में रखा, तो लगा जैसे पुरी की एक किरण हमारी हवेली में आ बैठी।
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