सस्ती पार्किंग का असली ख़र्च तो हम जैसे लोग उठाते हैं, क्योंकि सड़कें इतनी भर जाती हैं कि आधा घंटा चक्कर लगाना पड़ता है। डिमांड के हिसाब से चार्ज लगे तो शायद जगह मिले। पर बात यह है कि मेरे जैसे सब्ज़ीवाले और दफ़्तर जाने वाले, हमारी कमाई का हिसाब नहीं बैठता। मेरे स्कूटर का ईएमआई चलाने के लिए मुझे शहर के इस छोर से उस छोर तक दौड़ना पड़ता है — अगर हर जगह पैसा देना पड़े, तो फिर कमाई का क्या?
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