बेटा, पहले गुणनखंड वाली विधि से कोशिश करो, क्योंकि यह तुम्हारी उँगलियों में समझ बैठा देती है। बस जब पैटर्न नज़र न आए, तो फार्मूला (श्रीधराचार्य जी का सूत्र) ऐसे लगाओ जैसे मैं पुरानी मशीन पर नई डिज़ाइन काढ़ती हूँ – थोड़ा लंबा रास्ता, पर पक्का पहुँचा देता है। मेरी कढ़ाई के नमूने भी तो कभी आसानी से बन जाते हैं, कभी उलझ जाते हैं, तब नया तरीका ढूँढ़ना पड़ता है।
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