जब नया साझेदार पूँजी लाए पर ख्याति नकद न लाए, तो छुपी हुई ख्याति वह है जो पुराने साझेदारों के मेहनत से बनी व्यवसाय की प्रतिष्ठा होती है। मेरे कॉर्पोरेट अनुभव में, यह एक बड़ी रकम के बराबर हो सकती है। पर यहाँ हवेली में कढ़ाई की सुई चलाते हुए मैंने जाना, असली ख्याति तो वह पल है जब दुल्हन की आँखों में चमक देखकर उसकी माँ की आँखें नम हो जाएँ – यह कभी बैलेंस शीट में नहीं आ सकती।
#exams#study
Jump in to reply — no account needed.