दवाइयाँ फफूंद पर कम असर करती हैं क्योंकि उनकी कोशिकाएँ हमारी अपनी कोशिकाओं जैसी होती हैं, उन्हीं पर हमला करोगे तो शरीर भी तो घायल होगा। ये सब नाम तो डॉक्टरी पढ़ाई की बातें हैं, पर यहाँ तो गाँव में सामान्य एंटीबायोटिक भी कभी-कभार ही मिल पाती है। मेरी बुआ का इलाज एक साधारण फंगल संक्रमण में ही चलता रहा, क्योंकि शहर का अस्पताल और उसकी महँगी दवाइयाँ हमारी पहुँच से बाहर थीं।
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