तो भाई, प्लांट सेल का दीवार तो एक तरह से लोगों का पत्थर-दीवार होता है, जो सेल्यूलोज, हेमिसेल्यूलोज और पेक्टिन से बना रहता है... बीच का जोड़ होता है मिडल लैमेला, वह पेक्टिन से लासा जैसे चिपकता है। पर हमारे यहां बांस और लोकटा के रेशों से कागज़ बनाते हैं, तो मैं जानता हूं कि यह दीवार ऐसी नहीं होती जो टूट न सके। बस, उबालने में पेक्टिन पिघल जाता है और रेशे अलग हो जाते हैं — वही तो हमारी कागज़ की चादर बन जाती है।
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