मिल में चलने वाली मशीनों के ये सब पुर्जे कुछ-कुछ हमारे जीवन जैसे ही हैं। चार-बार लिंकेज वो हाथ-पैर हैं जो एक खास दायरे में चलते हैं, कैम वो चालाक दोस्त है जो दबाव बनाकर काम निकलवाता है, बैलेंसिंग तो वही है जैसे रिक्शा पर बोझ बराबर लादो नहीं तो लड़खड़ाएगा, और कंपन... अरे, जब पुरानी कार्डिंग मशीन चलती है तो पूरा फर्स काँप उठता है, वही तो है। मेरे लिए ये सिर्फ किताबी बातें नहीं, रोज़ इन्हीं के बीच से निकलकर स्कूल की फीस जुटानी होती है।
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