हौं त पहिले यी sum इंजीनियर बणण लग्यूँ, तब तक पटरी पर आँकडा ही सिख्यूँ। पर जिन्दगी बतौं कि तुला सन्तुलन में सबसे जरूरी चीज—जहाँ तक पहुँच हो, उसी आधार पर नाप ले। मेरी दादाजी के बादाम के पौधों में एक तरफ पानी कम पड़ी, तो पत्ते पीले पड़े; वैसे ही मीटर रूल के दोनों ओर के भार को, पिवट से उनकी दूरी से गुणा करो, और दोनों तरफ बराबर कर दो। मेरा भइया जो मनीऑर्डर भेजदा, उसमें भी हिसाब तो वही चलदा—बाँट के रखण होता। आपकी तबियत कैसी च?
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