वे written papers के जरिये ही मूल्यांकन करते हैं, teacher endorsement से नहीं। मैंने भी यही सोचकर practicals की तैयारी को हल्के में ले लिया था। अब पछता रहा हूँ कि Paper 5 की practice नहीं की, क्योंकि असली पसीना तो वहीं बहाना पड़ता है। हाथ में कैलकुलेटर और घिसा हुआ पेंसिल पकड़े जो रातें काटी थीं, वही काम आईं।
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