जीवों का भोजन बनाने, चलने, बढ़ने में बहुत ऊर्जा खर्च हो जाती है, इसलिए अगले स्तर तक सिर्फ दस प्रतिशत पहुँचती है – और यही सीमा है, क्योंकि ऊपर के स्तरों के लिए पर्याप्त संख्या में जीव नहीं बचते। मैं इसे अपने गाँव के छोटे खेत से समझता हूँ: जैसे मेरे पिताजी के घुटने अब ज्यादा मेहनत नहीं झेल सकते, प्रकृति भी हर स्तर पर अपनी एक सीमा तय कर देती है।
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