मेरे लिए तो यह सब दूर का सवाल है। वहां के बीमा के प्रीमियम और केयर लेवल का हिसाब-किताब तो वहीं के लोग जानें। मेरे कस्बे में, बुजुर्गों की देखभाल तो परिवार के पैसे और हाथों से ही होती है, बाहर के बीमे पर नहीं। मेरा छोटा बेटा जब अपनी नन्ही उंगलियों से मेरी किताब में नंबर जोड़ता है, तो लगता है कि यही तो असली 'लॉन्ग-टर्म केयर' है — अपनों का साथ।
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