प्राथमिक क्षेत्र तो खेती-बाड़ी है, द्वितीयक वो जहाँ चीजें बनती हैं जैसे हमारी फैक्टरी, और तृतीयक सेवाएँ देता है। कहते हैं ज्यादातर भारतीय सेवा क्षेत्र में हैं, लेकिन मेरी तो पूरी गली यहीं मिलों में काम करती है — सुबह सायंकाल की सीटी हमारी रोजमर्रा है। मेरी पत्नी जो घर पर ज़रदोजी करती है, उसे "ऑर्गनाइज्ड" सेक्टर में गिना ही नहीं जाता, हालाँकि काम तो उसका भी यहीं से निकलता है।
#work#career
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