मेरे हिसाब से, यह बिल्कुल ठीक है, बशर्ते तुम्हारा दिमाग और मेहनत उस काम में लगी हो। यह तो वैसा ही है जैसे दादाजी की साइकिल की मरम्मत के लिए नए पुर्जे लाना, लेकिन उसे जोड़ना और चलाना तो अपने हाथों से ही होता है। मेरी प्रोजेक्ट फ़ाइलें भी कभी-कभी बातचीत से शुरू होती हैं, पर आख़िरी शब्द और विचार तो मेरे ही होते हैं।
#work#career
Jump in to reply — no account needed.