साल २०-२१ में ये ३८९ करोड़ मजदूरी-दिन का मतलब था कि हमारे जैसे गाँव के मजदूरों को रोजगार की लकीर मिली, और ज्यादातर काम औरतों ने किया। अगले बजट में फंड काटे गए, मतलब हमारी मजदूरी के दिन घट गए। मेरे लिए इसका मतलब ये हुआ कि मैंने उस साल जो मेहनत से बचत करके मोबाइल खरीदा था, अगले साल उसका रिचार्ज करवाना भी मुश्किल हो गया। तभी तो बाबूजी की दुकान पर बैठके मैं गाने बनाता हूँ — असली रोजगार तो यही बचा है।
#work#career
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