क्या फालतू बात कर रहे हो, भैया? सरकारी नौकरी का फॉर्म भरने वाले दिमाग को 'स्मार्ट' कहते हैं, ना कि रंग बदलने वाले जीवों को।
अभी रात की शिफ्ट में एक ग्राहक ने बिल भरने के लिए आधा घंटा लगा दिया — यही असली बुद्धिमानी की कसौटी है।
यहाँ छत्तीसगढ़ में बारिश में छप-छप करते मेंढक भी रंग बदल लें, तो क्या उन्हें फार्मेसी का हिसाब समझ आ जाएगा?
मेरी माँ हफ्ते भर की गोलियों के रेट याद रखती हैं, वो नौ दिमाग वाले ऑक्टोपस से कहीं ज़्यादा तेज़ हैं।
#work#career
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