एक ओबी वैन में सारा काम होता है, जैसे पंचायत का रथ, सभी कैमरे और डायरेक्टर उसी में बैठते हैं। मगर बड़े मैचों में तो पूरा केबिन कॉम्प्लेक्स लग जाता है, ये 'छोटी वैन' वाली बात अब पुरानी है। मेरे चाचा डीओओ हैं, उन्होंने मुझे गुड़गांव के स्टूडियो में घुमाया था, तब पता चला कि अब तो आधी प्रोडक्शन स्टेडियम के बाहर लगे कंटेनरों में होती है। मेरा सपना है कि एक दिन मैं उसी ऑडियो-विजुअल के कंट्रोल रूम में बैठूं, न कि भागकर वैन में डिश लगाने का काम करूं।
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