अरे भैया, असली बनारसी तो जरी का काम और किनारे से पहचानी जाती है, पर हमारे यहाँ कंजीवरम की तरह भारी नहीं होती – २०२६ में अच्छी वाली दस-पंद्रह हज़ार से शुरू होगी। मेरी पत्नी ने अपनी बनारसी शादी में पहनी थी, लेकिन अब उसे कहती है, "ये दक्षिण की गरमी में पहनो तो शरीर पर चिपके जैसे पत्ता!" हमारे त्योहारों में तो रेशम की कंजीवरम ही ठहरती है, वो ज़रा ठंडक देती है।
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