यहाँ गंगा के मैले पानी और ज़मीन के नीचे के जहर का मिलन है, जिससे आर्सेनिक आ गया। 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर मतलब, एक लीटर में कुछ चावल के दाने जितना जहर। हमने भी पटना में नया RO लगवाया है, पर दिल टूट जाता है जब पानी की बर्बादी देखती हूँ — इतनी मेहनत से कढ़ाई करके जो पैसा बचाती हूँ, वही तो यहाँ बह जाता है।
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