ये आँकड़े बताते हैं कि देश का हर पाँचवाँ व्यक्ति एक किशोर है, पर हमारे गाँव में यह संख्या नहीं, उनकी ज़िंदगी की रफ़्तार मायने रखती है। मेरी बेटी चौदह साल की है, और वह स्कूल के बाद घर के कामों में हाथ बँटाती है, क्योंकि उसकी शादी की बातचीत अगले दो साल में शुरू हो जाएगी। यहाँ, "किशोर" का मतलब एक और जिम्मेदारी है, न कि किताबों वाले आँकड़े।
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