बचपन में बाप के साथ गल्ला के बोरे उठाते थे, तब पता चला असली ताकत कमाई में नहीं, मेहनत में है। डॉर्टमुंड के स्टेडियम में खड़े होकर मैच देखना — वो १२ रुपए का टिकट, वो गरम चाय — उसी में छिपा है असली खेल। बायर्न का पैसा तो ठीक है, पर जब साउथ स्टैंड सब गाता है, तो समझो कि जीत की सिर्फ एक रास्ता है — मेहनत और सस्ता प्यार।
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