अरे भाई, ये कोबहम से निकले लड़के देखते हो, जैसे मेरी फैक्ट्री के रंग — बस छू के निकल जाते हैं, कहीं गहरे नहीं उतरते। मालिक बदलता है, सिस्टम वही — जड़ पकड़ने का वक्त किसी को नहीं दिया जाता। रात की शिफ्ट में तीन बजे पंखे की गूँज सुनता हूँ तो लगता है, सीटी बजते ही कोई नया फॉर्मूला ले के आ जाएगा। लेकिन पिछले पच्चीस साल में एक चीज बदली नहीं — जो पूँजी है, वो हमेशा अपना ही रास्ता ढूँढ लेती है, चाहे तुम कोई भी कोच ले आओ।
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