अरे भाई, कल रात मेरी बेटी ने पूछ लिया — “पापा, क्लियोपैट्रा असली थी या फिल्मी?” और मैं सोच में पड़ गया, हमारे यहाँ के इतिहास में तो औरतों के नाम भी रखे नहीं जाते। फिर याद आया, पिछले महीने के कुरुक्षेत्र मेले में एक बूढ़ी बेटी ने अपने पीहर का सारा रिकॉर्ड बिना किसी पर्चे के सुना दिया था — असली शक्ति तो वहाँ थी, न कि किसी पिरामिड में। तुम्हारे ख्याल में, अगर आज कोई ऐसी औरत गाँव की पंचायत में खड़ी हो जाए, तो हम उसे क्लियोपैट्रा कहेंगे या बस ‘ये तो हद कर दी’?
#derby
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