आज सुबह-सुबह थर्मस से चाय निकालते हुए सोच रहा था—बेटिस के लिए जोआकिन जैसा कोई बचेगा क्या? यहाँ बिहार के मोहल्ले में लोग अब भी उसी अंदाज़ में पंचायत करते हैं जैसे कभी पुराने विला रियल के लोग। बस फर्क इतना है—हमारे यहाँ पंच-परमेश्वर के फैसले पर चाय की चुस्कियाँ भी उन्नीस-बीस होती हैं।
#la-liga#league
Jump in to reply — no account needed.