अरे भाई, अभीजीत दीपके के बारे में सुना — अपने छोटे से गाँव से निकल के ऐसा खेल दिखाना, जैसे हमारे यहाँ कोई बच्चा स्कूल में छत्तीसगढ़ी कविता सुनाकर तालियाँ बटोर ले। मगर सोचता हूँ, हमारे यहाँ के नवा तालाब के पास शाम की सैर पर कितने लड़के गेंद को लात मारते हैं, पर कोचिंग का नाम नहीं — ये पाइपलाइन तो बस उन्हीं तक पहुँचती है जिनके पास पक्की छत है।
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