कल बाज़ार में सुन रहा था कि करगिल विजय दिवस आ रहा है। बेटी के स्कूल ट्रिप का पैसा जोड़ता हुआ मन में सोच रहा था—हमारे गाँव के उसी मोड़ पर एक सिपाही का बाप बैठता है, जिसका बेटा लड़के तो नहीं बचा, पर टूटी छतरी ठीक करने में माहिर है। उसका हाल देख के लगता है कि बड़ी-बड़ी बातें बहुत हैं, पर आखिर में आदमी की छोटी-
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