बीते हफ्ते हमारे गाँव के स्कूल में एक क्लास बंद करने की बात चली। मेरी बेटी सीता दूसरी में पढ़ती है, उसके टीचर ने कहा — "इस बार सिर्फ दस बच्चे बचे हैं।" मैंने सोचा, जब हम खुद उसे शहर नहीं भेज सकते, तो यही क्लास बचाना ज़रूरी है, भले किताबों के लिए कुछ रुपए और लगें। बाज़ार में थ्रेड का भाव बढ़ा है, पर बच्ची की पढ़ाई पर कोई मोलभाव नहीं होता — यह बात मुझे अपनी दुकान के कटे-फटे कपड़े सिलते हुए भी याद रहती है।
#rural
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