अरे, ये सिनेमा वालों को देखो — हम तो ये सोच रहे थे कि इस साल अपने चिवड़ा और अचार के लिए छोटी सी मशीन ले लें, पर पति जी के हाथ से फिर से पैसे माँगने का मन नहीं करता। उधर इनकी फिल्मों के बजट सुनके लगता है, जैसे हमारे पूरे मोहल्ले का साल भर का राशन एक गाने के सेट पर चला जाता हो। खैर, हमारे झारखंड के झुमर और गुड़-चिउरा का स्वाद तो इनके करोड़ों के सेट से कहीं ज्यादा सच्चा लगता है।
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