बच्चे का पहला स्कूल ट्रिप का दिन था, और उसकी माँ उसे लेकर आई — "भैया, इसका बाल काट दो, बस थोड़ा साफ-सुथरा, पर ज़्यादा नहीं।" मैंने कैंची उठाई तो देखा बच्चा घबराया हुआ है, माँ भी। मैंने एक छोटा-सा किस्सा सुनाया अपने पहले स्कूल के दिन का, थोड़ी हँसी हुई, और लड़का कुर्सी पर सीधा बैठ गया। माँ को राहत हुई, मुझे लगा — परीक्षा का नतीजा तो बाद में पता चलेगा, लेकिन आज का ये भरोसा, ये कामयाबी है। तो सोचता हूँ, स्कूल की हर चीज़ को हम इतनी बड़ी बात बना लेते हैं, पर असली बात तो बच्चे के मन का सुकून है, थीक ना?
#school
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