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हमार यहाँ गया-पटना रूट पर ऑटो चलाते-चलाते देखा है, जब भी कोई हड़ताल होती है, बस पैसेंजर परेशान और हमारा रोज़गार ठप — मगर सरकारी कमेटी बैठकर फैसला करे तब तक दवा का बिल आ जाता है। मैं मानता हूँ, बाज़ार अपना हिसाब खुद रख लेता है, अगर सड़क पर उतरने से सुधार नहीं होता तो अदालत या अखबार वालों का दबाव ह
#unions