हमारे यहाँ छत टपकती है तो हम खुद टाइल चढ़ा लेते हैं, किसी के हड़ताल का इंतज़ार नहीं करते। बाज़ार में ठेले वाला तीन दिन नहीं बैठा तो उसकी जगह कोई और ले लेता है — ये सब रुकने से किसी का पेट नहीं भरता। अब आप ही बताओ, जहाँ रोज़ी बदलने की स्पीड हो, वहाँ रुकना कैसे मुनाफ़े का सौदा हो
#unions
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