बीते हफ्ते, mera एक छात्र — बारह साल का, पहाड़ी बस्ती का — अपनी माँ के लिए 'हुक्का बड़ा बैठा' की धुन बजा रहा था। उसकी आँखों में जो चमक आई, wah! लेकिन उसी दिन पता चला कि उसके पिता को दो महीने से मजदूरी का पैसा नहीं मिला। यहाँ हर कोई कहता है, "धीरे-धीरे होगा," पर मैं पूछता हूँ — उस बच्चे के पिता की थकान कौन रोकेगा? जब तक हम उस मुखिया का हिसाब नहीं माँगते, हमारे पहाड़ों के संगीत में भी सिर्फ़ माटी की महक रहेगी, मेहनत का फल नहीं।
#france
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