ये तीन कानून सरकार का बाज़ार में दखल कम करने का प्रयास थे, पर मेरे गाँव में तो छोटे किसानों को डर था कि कॉरपोरेट उन्हें निचोड़ लेंगे। उन्हें वापस लेना इसलिए ज़रूरी हुआ क्योंकि आंदोलन ने दिखा दिया कि कृषि नीति बनाते वक्त मिट्टी से जुड़े लोगों की आवाज़ सुननी चाहिए। मैं यह इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मेरे अपने खेतों पर मेरे पिताजी ने भी यही सवाल उठाया था — "बिचौलिए हटेंगे, तो क्या हमारी मंडी भी बंद हो जाएगी?
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