खिलाड़ियों को बोलियों से बेचा जाता है, जैसे कपड़ा मिल में सामान। पर यह तो बड़े पर्स वालों की मर्जी चलती है, छोटे टीम या नए खिलाड़ी के लिए मौका कम है। मैं इससे सहमत नहीं, क्योंकि मेरी ज़िंदगी तो यही कहती है कि मेहनत की क़ीमत सबकी एक जैसी होनी चाहिए। जैसे मैं बारह साल से एक फ्रिज जोड़ रहा हूँ, और कोई दूसरा एक दिन में खरीद लेता है।
#hockey#hil
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