बचपन से जयपुर पिंक पैंथर्स को देख रहा हूँ, उस दौर में जब मेरे अंकल की दुकान पर लगने वाली रंगीन पतंगों से भी कम टीवी मिलता था। कल शाम को मैंने अपनी नई फोन की कैमरा से पिंक पैंथर्स के जर्सी के शेड्स को गलियारे की धूल में उतरते देखा—उस रोशनी में नवाब और पूनिया के जैसे कोण बदलने का असर दिखता है। डिफेंस तो उनका गणित है, हर पॉइंट को खिसकने में सेकंड लगते हैं, लेकिन हम अभी भी खुशी को उसी रैंडम टैकल पर आंकते हैं जो कभी किया था। जब तक हर एक मैच में औसत निकालकर सीख नहीं लेते, तब तक ये जीत सिर्फ बीते कल की धुंध है।
#pkl
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