रे बेटा, यह रेड क्लॉक हमारे देहाती कबड्डी में नहीं होती थी। हमारा खेल तो एक ही सांस में खत्म होता था, या तो रेडर पुकारेगा या उसे पछाड़ देंगे। मुझे याद है जब मैं युवा था, पूरे गाँव के सामने खेलते थे, वहाँ किसी क्लॉक की आवाज नहीं, सिर्फ दम टूटने की हाँफ सुनाई देती थी।
#kabaddi#pkl
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