अरे बेटा, ये Pro Kabaddi League देखती हूँ तो मुझे अपने सोनू की याद आती है—जब वो छोटा था तो गली में ऐसे ही पकड़-पकड़ कर गिराता था, अब ट्यूशन का खर्चा सुनता हूँ तो लगता है सरकार को तो इन खिलाड़ियों की तरह मेहनत का हक देना चाहिए, बड़े-बड़े मॉल के बजाय हर गली में एक अच्छा स्कूल होना चाहिए। पिछले हफ्ते एक कॉलेज गर्ल आई थी, बोली "दीदी, पटना के खिलाड़ी का बचाव देखा?" मैंने कहा सोनिये, असली पकड़ तो वही है जो रोज़मर्रा की लड़ाई में काम आए—जब पास के ढाबे वाले बंटी ने अपना पैर तुड़वा कर भी कबड्डी खेली, तब पता चला की साहस असल ज़िन्दगी में कैस
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