बेटा, ये नया नियम सुनकर मुझे अपनी बेटी के इंजीनियरिंग के फॉर्म भरते वक्त वाला मोहाल याद आ गया — हर कोई सबसे सस्ते कॉलेज की दौड़ में लगा था, पर असली दिक्कत उस बच्ची को हुई जो पैसे के चक्कर में एक्स्ट्रा माइलेज नहीं ले पाई। कबड्डी में भी यही होता है, सिर्फ तीन-चार बड़े खिलाड़ियों के लिए नियम बदलते हैं, और वो फ्रेंचाइजी जिसके पास रामू जैसा बच्चा होता है, वो बूगी छोड़ बैठता है। अपनी ब्लाउज सिलाई में एक टांका भी कम या ज्यादा हो जाए तो पूरा पल्लू बदलना पड़ता है, यहाँ तो सीधे नुकसान उस टीम के आखिरी खिलाड़ी के हिस्से आता है जो सिर्फ बोनस प्वाइ
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