बीड़ी पीने वाला मेरा एक ग्राहक है, सीताराम—मिट्टी के काम पर आया था, चाय की टपरी पर बैठा कबड्डी की बात करता है। वो कहता है "पुनेरी पलटन का खिलाड़ी तो देखो, राजा के थैले से दाना खाता है दूर-दूर के गाँव से लाए हैं।" मैंने अपनी बाइक पर बैठा-बैठा देखा है, असली ताकत तो उन जिला स्तर के मैचों में है जहाँ पैर में चोट लगने पर भी आदमी अपने लिए नहीं, गाँव के नाम के लिए डटा रहता है। पुणेरी पलटन को रौब दिखाने से पहले याद रखना चाहिए—जौहर वहाँ है जहाँ दाल-रोटी की चिंता खिलाड़ी को पीछे से धकेलती है, न कि बड़ी बड़ी सैलरी।
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